• तुम जिंदगी की वो कमी हो..

    जो जिंदगी भर रहेगी....!!

  • सारी दुनिया की खुशी अपनी जगह …,

    उन सबके बीच तेरी कमी अपनी जगह …..!

  • सोचते हैं जान अपनी उसे मुफ्त ही दे दें,

    इतने मासूम खरीदार से क्या लेना देना..!

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Sad Shayari

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तलब मौत की करना गुनाह है ज़माने में यारो… मरने का शौक है तो मुहब्बत क्यों नहीं करते !
ज़िन्दगी को न जाने ये कैसी आदत सी लगी है… साँसों पे कम और शर्तों पे ज्यादा जिए जाती है !
कुछ लोग, चाहे जितने बूढ़े हो जाएं, उन की सुंदरता नहीं मिटती,… यह बस उन के चेहरों से उतर कर उनके दिलों में आ बसती है !
हर वक़्त उसी के ख्यालों में खोया रहता हु… और उसे शिकायत है की मुझे खुद से फुरसत नहीं मिलती !
हमेशा साथ चलती ज़िन्दगी से क्यों खफा रहते हैं हम ?? जब साथ चलने वालों का काफिला रोज़ बनता बिगड़ता है !
मुझको क्या हक़ मैं किसी को मतलबी कहूँ,… मै खुद ही ख़ुदा को मुसीबत में याद करता हूँ !
क़ानून तो सिर्फ बुरे लोगों के लिए होता है… अच्छे लोग तो शर्म से ही मर जाते हैं !
मैं किसी काम का नहीं वरना , वो किसी काम से ही आ जाता
उनकी ना थी खता, हम ही कुछ गलत समझ बैठे यारो…. वो मुहब्बत से बात करते थे, तो हम मुहब्बत समझ बैठे !
घड़ी की फितरत भी अजीब है, हमेशा टिक-टिक कहती है, मगर,…. ना खुद टिकती है और ना दूसरों को टिकने देती है !
भुला के मुझको, अगर आप भी हो सलामत,… तो भुला के मुझको, सम्भालना मुझे भी आता हैं !
खता तेरी आँखों की नही है , कसूर मेरा है जो खुद को इनमे देख रहा था !!!
साँपों के मुक़द्दर में अब वो ज़हर कहाँ ? जो इन्सान आजकल बातों में उगल देते हैं !
पता है मैं हमेशा खुश क्यों रहता हूँ ..? क्योंकि, मैं खुद के सिवा किसी से कोई उम्मीद नहीं रखता !
जरुरी तो नहीं हर चाहत का मतलब इश्क हो कभी कभी कुछ अनजान रिश्तों के लिए भी दिल बेचैन हो जाता है..!!
अब किसी और के वास्ते ही सही,, पर अदाए उनकी आज भी वैसी ही हैं..
सांसों के सिलसिले को ना दो ज़िन्दगी का नाम… जीने के बावजूद भी, मर जाते हैं कुछ लोग !
मैंने सोचा के उसे अपना बना लू पर वो तोह अपना हुआ नही और मैं खुद की न रही !!!
ख़त में मेरे ही ख़त के टुकड़े थे और… मैं समझा के मेरे ख़त का जवाब आया है..
कुछ रिशते ऐसे होते हैं. जिनको जोड़ते जोड़ते इन्सान खुद टूट जाता है।
छोड़कर अपनी यादों की निशानियां मेरे दिल में, वो भी चले गये वक्त की तरह
कभी फुर्सत मिले तो सोचना जरूर, एक लापरवाह लड़का क्यों तेरी परवाह करता था…
उन जख्मो को भरने में बक्त लगता है , जिनमे शामिल हो अपनों की मेहरवानिया !
तलब मौत की करना गुनाह है ज़माने में यारो… मरने का शौक है तो मुहब्बत क्यों नहीं करते !
ज़िन्दगी को न जाने ये कैसी आदत सी लगी है… साँसों पे कम और शर्तों पे ज्यादा जिए जाती है !
कुछ लोग, चाहे जितने बूढ़े हो जाएं, उन की सुंदरता नहीं मिटती,… यह बस उन के चेहरों से उतर कर उनके दिलों में आ बसती है !
हर वक़्त उसी के ख्यालों में खोया रहता हु… और उसे शिकायत है की मुझे खुद से फुरसत नहीं मिलती !
हमेशा साथ चलती ज़िन्दगी से क्यों खफा रहते हैं हम ?? जब साथ चलने वालों का काफिला रोज़ बनता बिगड़ता है !
मुझको क्या हक़ मैं किसी को मतलबी कहूँ,… मै खुद ही ख़ुदा को मुसीबत में याद करता हूँ !
मैं किसी काम का नहीं वरना , वो किसी काम से ही आ जाता
क़ानून तो सिर्फ बुरे लोगों के लिए होता है… अच्छे लोग तो शर्म से ही मर जाते हैं !
उनकी ना थी खता, हम ही कुछ गलत समझ बैठे यारो…. वो मुहब्बत से बात करते थे, तो हम मुहब्बत समझ बैठे !
घड़ी की फितरत भी अजीब है, हमेशा टिक-टिक कहती है, मगर,…. ना खुद टिकती है और ना दूसरों को टिकने देती है !
भुला के मुझको, अगर आप भी हो सलामत,… तो भुला के मुझको, सम्भालना मुझे भी आता हैं !
खता तेरी आँखों की नही है , कसूर मेरा है जो खुद को इनमे देख रहा था !!!
साँपों के मुक़द्दर में अब वो ज़हर कहाँ ? जो इन्सान आजकल बातों में उगल देते हैं !
पता है मैं हमेशा खुश क्यों रहता हूँ ..? क्योंकि, मैं खुद के सिवा किसी से कोई उम्मीद नहीं रखता !
जरुरी तो नहीं हर चाहत का मतलब इश्क हो कभी कभी कुछ अनजान रिश्तों के लिए भी दिल बेचैन हो जाता है..!!
अब किसी और के वास्ते ही सही,, पर अदाए उनकी आज भी वैसी ही हैं..
सांसों के सिलसिले को ना दो ज़िन्दगी का नाम… जीने के बावजूद भी, मर जाते हैं कुछ लोग !
मैंने सोचा के उसे अपना बना लू पर वो तोह अपना हुआ नही और मैं खुद की न रही !!!
ख़त में मेरे ही ख़त के टुकड़े थे और… मैं समझा के मेरे ख़त का जवाब आया है..
कुछ रिशते ऐसे होते हैं. जिनको जोड़ते जोड़ते इन्सान खुद टूट जाता है।
छोड़कर अपनी यादों की निशानियां मेरे दिल में, वो भी चले गये वक्त की तरह
कभी फुर्सत मिले तो सोचना जरूर, एक लापरवाह लड़का क्यों तेरी परवाह करता था…
उन जख्मो को भरने में बक्त लगता है , जिनमे शामिल हो अपनों की मेहरवानिया !
तलब मौत की करना गुनाह है ज़माने में यारो… मरने का शौक है तो मुहब्बत क्यों नहीं करते !
ज़िन्दगी को न जाने ये कैसी आदत सी लगी है… साँसों पे कम और शर्तों पे ज्यादा जिए जाती है !
कुछ लोग, चाहे जितने बूढ़े हो जाएं, उन की सुंदरता नहीं मिटती,… यह बस उन के चेहरों से उतर कर उनके दिलों में आ बसती है !
हर वक़्त उसी के ख्यालों में खोया रहता हु… और उसे शिकायत है की मुझे खुद से फुरसत नहीं मिलती !
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