• तुम जिंदगी की वो कमी हो..

    जो जिंदगी भर रहेगी....!!

  • सारी दुनिया की खुशी अपनी जगह …,

    उन सबके बीच तेरी कमी अपनी जगह …..!

  • सोचते हैं जान अपनी उसे मुफ्त ही दे दें,

    इतने मासूम खरीदार से क्या लेना देना..!

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Pehchano kese tujh ko meri zindagi bata guzri hai tu qareeb se lakin naqqb mein..
Meri muhabat pe agar waham sa hone lage bachpan ki di huwi, nishaniyun ka rukh karna..
Satane se iss k huwa aaj maloom ke ishq hum ne is se ziyada kar liya..
Wasta hum se tu pehle hi wo kam rakhte hain wo humi hain jo muhabat ka bharam rakhte hain..
Kabhi dil ye baag o bahar tha, magar ab nahi tera zikar wajah e qaraar tha magar ab nahi..
Kabhi mein bhi teri muhabaton ke nashe mein tha meri ankh mein bhi khumaaar tha magar ab nahi..
Tu markazi kirdaar tha kal tak tu magar dost ab meri kahani hai teri zaat se khali..
Kese din aye, tera zikar fasana huwa hai aise lagta hai, tujhe dekhe zamana huwa hai..
Mein ne apne dil ko khud be jaan kar ke rakh diya raazdan-e-dil ko yun anjaan kar ke rakh diya..
Agar hai ishq tu wo qabal e biyan nahi agar tu qabal e biyan hai wo dhoka hai..
Ajeeb door hai kisi ki yahan sunta nahi koi be sabab deewanoo ko yahan satate hain log..
Irada jab bhi karta hoon bin tere mein jeene ka ik uljhan si ban jati hai mujhe suljhane nahi deti..
Kahun ache lagte ho mujhe tum se muhabat hai dharey reh gaye sab mansoobe wo jab aya mere samne.
Tera mera ajeeb nata hai naam dene se toot jata hai..
Chamak raha hai jo ek satara, nahi rahe ga kisi ke hum aur koi hamara nahi rahe ga..
Gusse mein joh chod jaye woh wapas aa sakta hain Muskurakar chodkar jane wala kabi wapas nahi aata
अच्छा लगता हैं तेरा नाम मेरे नाम के साथ, जैसे कोई खूबसूरत सुबह जुड़ी हो, किसी हसीन शाम के साथ !
ज़ख़्म दे कर ना पूछा करो, दर्द की शिद्दत, दर्द तो दर्द होता हैं, थोड़ा क्या, ज्यादा क्या !!
हम से खेलती रही दुनिया ताश के पत्तो की तरह, जिसने जीता उसने भी फेका जिसने हारा उसने भी फेका !
बदन के घाव दिखा कर जो अपना पेट भरता है, सुना है, वो भिखारी जख्म भर जाने से डरता है!
मेरी हैसियत से ज्यादा मेरे थाली में तूने परोसा है, तु लाख मुश्किलें भी दे दे मालिक, मुझे तुझपे भरोसा है।
आज ऊँगली थाम ले मेरी, तुझे मैं चलना सिखलाऊँ कल हाथ पकड़ना मेरा, जब मैं बुढा हो जाऊं …!!!!
रूठे हुए को मनाना तो दस्तूर-ए-दुनिया….., पर रूठे की मानना क्यों नहीं सीखती दुनिया
मत तोल मोहब्बत मेरी अपनी दिल्लगी से…. चाहत देखकर मेरी अक्सर तराज़ू टूट जाते है
Ye meri mohabbat thi ki deewangi ki intiha Tere karib se gujar gya tere hi khayalo mein
Faasle Kab Kam Huye Hai Raabto Ke Baad Bhi Ajnabi The, Ajnabi Hai Mohabbat Ke Baad Bhi
Najane kyu rait ki tarah hatho se nikal jate hai log Jinhe hum Zindagi samaj kar kabhi khona nai chahte
Meri aankho ka har aansoo tere pyar ki nishani hai Jo tu samjhe toh moti h, na samjhe toh pani hai
Kabi zid me hi tere ho gye to kbhi dil ne tujko gawa diya Kashmkash me h sanam k tune Yaad rakha ya bhula diya
Teri mohabbat se lekar tere Alvida kahne tak Mene sirf tujhe chaha hai tujse kuch nahi chaha
Lagti hain jinke Dil par, wo aankho se nahi rote Jo apno ke hi naa ho paye, wo kisi ke nahi hote
किसी ने क्या खूब कहा है .. सिर्फ गुलाब देने से अगर मोहब्बत हो जाती,, तो माली सारे शहर का महबूब बन जाता…
अजीब दस्तूर है, मोहब्बत का, रूठ कोई जाता है, टूट कोई जाता है।
बहुत लम्बी ख़ामोशी से ग़ुजरा हूँ मैं किसी से कुछ कहने की तलाश में.
चाहने वालो को नही मिलते चाहने वाले. हमने हर दगाबाज़ के साथ सनम देखा है.
अजीब सी बस्ती में ठिकाना है, मेरा जहाँ लोग मिलते कम झांकते ज़्यादा है.
सिर्फ दिल ही दाव पर लगाया था पर उसने तो मेरी जान ही ले ली.
शौक से तोडो दिल मेरा, मुझे क्या परवाह, तुम्ही रहते हो इसमें, अपना ही घर उजाड़ोगे.
आने वाला कल अच्छा होगा, बस इसी सोच मे आज बीत जाता है.
ज़िन्दगी जोकर सी निकली, कोई अपना भी नहीं….कोई पराया भी नहीं.
वो बोलते रहे हम सुनते रहे, जवाब आँखों में था वो जुबान में ढूंढते रहे.
किसी ने धूल क्या झोंकी आखों में, पहले से बेहतर दिखने लगा है.
हाथ की लकीरें भी कितनी अजीब हैं, हाथ के अन्दर हैं पर काबू से बाहर.
रिश्ते उन्ही से बनाओ जो निभानेकी औकात रखते हो, बाकी हरेक दिल काबिल-ऐ-वफा नही होता।
एक हसरत थी की कभी वो भी हमे मनाये..पर ये कम्ब्खत Dil कभी उनसे रूठा ही नही.
तुम मुझे अच्छे या बुरे नहीं लगते बस अपने लगते हो.
तजुर्बे ने एक ही बात सिखाई है, नया दर्द ही पुराने दर्द की दवाई है!
वो शाम का दायरा मिटने नहीं देते, हमसे सुबहे का इंतज़ार होता नहीं है.
मेरी दिल की दिवार पर तस्वीर हो तेरी _और तेरे हाथों में हो तकदीर मेरी!
वो बड़े ताज्जुब से पूछ बैठा मेरे गम की वजह, फिर हल्का सा मुस्कराया और कहा, मोहब्बत की थी ना!
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