• तुम जिंदगी की वो कमी हो..

    जो जिंदगी भर रहेगी....!!

  • सारी दुनिया की खुशी अपनी जगह …,

    उन सबके बीच तेरी कमी अपनी जगह …..!

  • सोचते हैं जान अपनी उसे मुफ्त ही दे दें,

    इतने मासूम खरीदार से क्या लेना देना..!

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Waqt Shayari

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मेरी ना रात कटती है… और ना ज़िन्दगी…, वो शख्स मेरे वक़्त को इतना धीमा कर गया…।
Suna Hai Log Pyar Mai Jaan De Dete Hain Magar Jo Waqt Nahi Deta Wo Jaan Kahan Se Denge.
लगता था ज़िन्दगी को बदलने में वक़्त लगेगा. . . पर क्या पता था बदलता हुआ वक़्त ज़िन्दगी बदल देगा.
आँखोँ के परदे भी नम हो गए बातोँ के सिलसिले भी कम हो गए. . . पता नही गलती किसकी है वक्त बुरा है या बुरे हम हो गए.
कुछ नाकामयाब रिश्तों में पैसे नहीं.. बहुत सारी उम्मीदें और वक्त खर्च हो जाते हैं.
घड़ी की फितरत भी अजीब है, हमेशा टिक-टिक कहती है, मगर, ना खुद टिकती है और ना दूसरों को टिकने देती है !
Selfie nikaalna to seconds ka kaam hai Waqt to Image banane Me lagta hai
Sabka Bura time aata hai.. Tera me laungaa.
वक्त आता है तो बदल जाती है हर सूरत… चाँद भी तो हमेशा अधूरा नहीं रहता..
मेरे साथ बैठ कर वक़्त भी रोया एक दिन बोला बन्दा तू ठीक है मैं ही ख़राब चल रहा हूँ .
Na To Tum Bure Sanam Na Hi Hum Bure Hain, Kuchh Kismat Buri Hai Kuchh Waqt Bura Hai.
Zindgi Ne Mere Dard Ka Kya Khoob Ilaaj Sujhaya, Waqt Ko Dawaa Bataya Khwahishon Se Parhej Bataya.
Log Kehte Hain Ki Waqt Kisi Ka Gulam Nahi Hota, Fir Kyun Tham Sa Jata Hai Gamo Ke Daur Mein.
sadā aish daurāñ dikhātā nahīñ gayā vaqt phir haath aatā nahīñ sab āsān huā jaatā hai mushkil vaqt to ab aayā hai.
vaqt jab karvaTeñ badaltā hai fitna-e-hashr saath chaltā hai.
vaqt rahtā nahīñ kahīñ Tik kar aadat is kī bhī aadmī sī hai
Jo rounga to palkon pe nami reh jayegi, Zindagi bas naam ki zindagi reh jayegi, Ye nahi ki tum bin jee na paunga, Haan magar zindagi mein har waqt ek teri kami reh jayegi.
Unka bharosa mat karo, Jinka khayal waqt ke sath badal jaye, Bharosa unka karo jinka khayal waise hi rahe, Jab aapka waqt badal jaye…!!
Sacha pyaar hamesha galat insaan se hota hai, Aur jab ache insaan se hota hai tb galat waqt pyar hota hai
Tum Kya Jano Kya Hai Tanhai Is Tute Hue Patte Se Pucho Kya Hai Judai Yu Bewafa Ka Ilzam Na De Zalim Is Waqt Se Puch Kish Waqt Teri Yaad Na Aayi
Tujhe Chahne wale kum na honge, Waqt ke sath shayad hum na honge, Chahe kisi ko kitna bhi pyaar dena, Lekin teri yaadon ke haqdar sirf hum hi honge.
Talash hai ek aise shaks ki, Jo aankho mai us waqt dard dekh sake, Jab sab log mujse khete hain, Kya yaar hamesha hansti rehti ho.
Waqt ki raftaar ruk gayi hoti, Sharam se aankhein jhuk gayi hoti, Agar dard janti shamma parwaane ka, To jalne se pehle hi woh bujh gayi hoti.
चमक यूँ हि नही आती है, खुद्दारी के चेहरे पर ।। अना को हमने दो-दो वक़्त का फाका कराया है ..!!
हर गुज़रते हुए पल का तुझे देना है हिसाब।। ज़िंदगी का ये सफ़र वक़्त-गुज़ारी तो नहीं..!!
चढ़ने दो अभी और ज़रा वक़्त का सूरज।। हो जाएँगे छोटे जो अभी साये बड़े हैं..!!
ना मोहब्बत ना दोस्ती के लिये वक़्त रुकता नहीं किसी के लिये….
वक़्त के सांथ-सांथ चलता रहे यही बेहतर है आदमी के लिये…!!
न जाने कितने चरागों को मिल गई शोहरत एक आफ़ताब के बे-वक़्त डूब जाने से..!!
किस शै पे यहाँ वक़्त का साया नही होता इक ख्व़ाब-ए-मोहब्बत है की बूढ़ा नही होता.!!
किस शै पे यहाँ वक़्त का साया नही होता इक ख्व़ाब-ए-मोहब्बत है की बूढ़ा नही होता.!!
ये फ़ैसला तो शायद वक़्त भी न कर सक सच कौन बोलता है , अदाकार कौन है.!!
अब उसे देखो तो आँखों पे यकीं आता नहीं वक़्त उसके जिस्म का सब संगे-मरमर पी गया
निभी ना वक़्त की हम ख़ानमाँ-खराबों से हवा उलझती रही टूटती तनाबों से..!!
वक़्त से पूछ रहा है कोई ज़ख्म क्या वाक़ई भर जाते हैं..
हर एक राज़ कह दिया,बस एक जवाब ने हमको सिखाया वक़्त ने,तुमको क़िताब ने.!!
ऐ रहबर-ए-कामिल चलने को तैयार तो हूँ पर याद रहे उस वक़्त मुझे भटका देना जब सामने मंज़िल आ जाए
जब भी अंजाम-ए-मुहब्बत ने पुकार ख़ुद को वक़्त ने पेश किया हम को मिसालों की तरह
सुना है वक़्त कुछ ख़ुश-रंग लम्हे ले के गुज़रा है मुझे भी ‘शाद’ कर जाता गुज़रने से ज़रा पहले
वक़्त के सांथ-सांथ चलता रहे यही बेहतर है आदमी के लिये.!!
एक ज़ुगनू ने कहा मैं भी तुम्हारे साथ हूँ, वक़्त की इस धुंध में तुम रोशनी बनकर दिखो.!!
ठहर जा वक़्त ज़रा रुक जा सासें मेरी~~ मेरे महबूब को महसूस कर लूँ कुछ पल के िलये..!!
जिंदगी एक हसींन ख्वाब है माना, हर हसींन ख्वाब को ताबीर नहीं मिलती टूट के वक्त के साहिल पे बिखर जाते है, कुछ रिश्ते जिन्हें जंजीर नहीं मिलती
दर्द बे वक्त होगया रुसवा एक आंसू था पी लिया होता!
तुमने वो वक्त कहां देखा जो गुजरते ही नहीं दर्द की रात किसे कहते हैं तुम क्या जानो!
अभी कुछ वक्त बाकी है अभी उम्मीद कायम है कहीं से लौट आओ तुम मुह्ब्बत सासं लेती है
वक़्त कभी एक सा रहता नहीं सुन लो साहेब, खुद भी रो पड़ते है औरो को रुलाने वाले
जा़या होने से बचा ले मुझे माबूद मेरे ये न हो मुझे वक्त खेल तमाशा करदे
खुदा तो इक तरफ, खुद से भी कोसों दूर होता है, बशर जिस वक्त ताकत के नशे में चूर होता है!!
चढ़ने दो अभी और ज़रा वक़्त का सूरज, हो जायेंगे छोटे जो अभी साये बड़े हैं !!
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